NavIC: भारत की उपग्रह नेविगेशन प्रणाली

NavIC प्रणाली (नेविक)

1. उद्देश्य:
NavIC (Navigation with Indian Constellation) प्रणाली भारत का एक क्षेत्रीय उपग्रह नेविगेशन सिस्टम है, जिसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य भारत और इसके आस-पास के क्षेत्र (लगभग 1500 किमी तक) में सटीक स्थिति और समय जानकारी प्रदान करना है।

2. घटक:
यह प्रणाली सात उपग्रहों के एक समुच्चय (कॉनस्टेलेशन) पर आधारित है, जो भू-स्थिर और भू-समान्य कक्षाओं में स्थित हैं। इसके अलावा, इसमें ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन भी शामिल हैं, जो उपग्रहों की निगरानी और नियंत्रण करते हैं।

3. विशेषताएँ:

सटीकता: NavIC नागरिक उपयोग के लिए 20 मीटर से बेहतर स्थिति सटीकता प्रदान करता है और सैन्य उपयोग के लिए और भी बेहतर सटीकता प्रदान करता है।

उपलब्धता: यह प्रणाली शहरी क्षेत्रों और घने वन क्षेत्र में भी विश्वसनीय नेविगेशन सेवाएँ प्रदान करने के लिए डिज़ाइन की गई है।

सेवा प्रकार: NavIC दो प्रकार की सेवाएँ प्रदान करता है:

मानक स्थिति सेवा (SPS): नागरिक उपयोगकर्ताओं के लिए।

प्रतिबंधित सेवा (RS): अधिकृत उपयोगकर्ताओं (जैसे सैन्य और सरकारी संस्थाएँ) के लिए।

 

4. अंतरराष्ट्रीय सहयोग:
हालाँकि NavIC मुख्यतः भारतीय उपयोग के लिए है, यह अन्य वैश्विक नेविगेशन प्रणालियों जैसे GPS, GLONASS, और Galileo के साथ संगत है।

5. अनुप्रयोग:
NavIC के कई अनुप्रयोग हैं, जिनमें शामिल हैं:

परिवहन

कृषि

सर्वेक्षण

आपदा प्रबंधन

अन्य सेवाएँ जो सटीक स्थिति की आवश्यकता होती हैं।

6. लॉन्च:
NavIC का पहला उपग्रह 2013 में लॉन्च किया गया था, और यह प्रणाली 2018 में पूरी तरह से कार्यात्मक हो गई।

7. महत्व:
NavIC भारत के लिए नेविगेशन प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने, राष्ट्रीय सुरक्षा को बढ़ाने, और अर्थव्यवस्था तथा अवसंरचना विकास में विभिन्न अनुप्रयोगों को समर्थन देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।

NavIC प्रणाली भारत को एक सक्षम और विश्वसनीय उपग्रह नेविगेशन प्रणाली प्रदान करती है, जो देश के विकास और सुरक्षा में योगदान करती है।