चाणक्य ने नालंदा के महत्वपूर्ण स्थान को समर्थन करते हुए कहा, “शिक्षा का सार विद्या में और नालंदा जैसे गुरुकुलों में होता है, जहां ज्ञान की अनगिनत धाराएं समाहित होती हैं।”
उन्होंने नालंदा की महत्वपूर्णता को बताते हुए कहा, “शिक्षा का मकसद व्यक्ति को सम्पूर्णता की ओर ले जाना होता है, और नालंदा जैसे विद्यालय इस कारण समृद्धि और विकास की कड़ी में योगदान करते हैं।”
चाणक्य ने शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका पर चर्चा करते हुए कहा, “नालंदा जैसे विद्यालय शिक्षा को समर्पित करते हैं, जिससे समाज में ज्ञान का प्रचार होता है और समृद्धि की ऊँचाइयों की प्राप्ति होती है।”
इसके अलावा, चाणक्य ने विद्या के महत्व को बताते हुए कहा, “विद्या सबसे बड़ा धन है, और वह नालंदा जैसे स्थानों में ही समृद्धि का स्रोत बन सकती है।”