आर्थिक संवेदनशीलता: एक कविता”

बजट बनाएं, खर्चों का हिसाब करें,  
जानें कहाँ पैसा बहा रहे हैं हर बार।  
जरूरत से ज्यादा जो खर्च हैं होते,  
उन्हें काटें, फिर से सोचें, बार-बार।  
क्या हैं तुम्हारे हाथ की महारतें?  
क्या हुनर ला सकते हैं कुछ कमाई?  
फ्रीलांस, पार्ट-टाइम काम तलाशें,  
हो सकता है ये राहत लाए, भाई।  
सलाहकार से बात करें, राय लें,  
निवेश और बचत की राह पर चलें।  
सरकारी योजना का लाभ उठाएं,  
जो मदद मिले, उसे हाथ से न जाने दें।  
लंबी अवधि की सोच बनाए रखें,  
भविष्य के लिए भी कुछ बचाए रखें।  
मुश्किल समय में भी संयम बनाए रखें,  
सजग रहें, ध्यान दें, सुधार लाए रखें।