वक़्त Posted on by तू वक़्त नहीं जो लौट आए, मैं कैलेंडर नहीं जो बता पाए। चलो कुछ ऐसा करते हैं, लम्हों को जरा थाम लेते हैं। बीते को ना रोएं हम, आने वाले में खो जाएं हम। थोड़ा पीछे, थोड़ा आगे, हर पल को जी लें बड़े प्यार से
Aapka tarana “अंधकार से प्रकाश की ओर: एक कविता” 0 देख, अंधकार, नयन बंद होते, दिखते हैं, पर देख, दु स्वप्न, अचानक आंखें खुल जाती हैं। डर, डर उठ जाती हूं दु; स्वप्नों से, सन्नाटा […]
Aapka tarana मोटरोला की कहानी: टेक्नोलॉजी की रेस 0 यह कहानी है मोटरोला की, जब गूगल ने उसकी डोर थामी, 12.5 बिलियन का वो सौदा, दुनिया में मची खलबली भारी। पेटेंट्स थे असली वजह, […]
Aapka tarana ग़ज़ल 0 ग़ज़ल — Saurabh वो लोग दूरियों के ही क़ाबिल हैं, जो आपकी नज़दीकी के क़ाबिल नहीं हैं। जो चाहत को बस खेल समझ बैठे, वो […]