भाग्य से भी ऊंचा Posted on by भाग्य से भी ऊंचा कर्म है, जो स्वयं के हाथों में है। क्यों ढूँढें सितारों में निशान, जब राह खुद हम बना सकते हैं? हर कदम पर, कर्म ही दीपक है, जो अंधेरों को मि टा सकता है।
Aapka tarana शागिर्द 0 शागिर्द, विद्या का अद्भूत सफर, ज्ञान की कई कहानियों का सार। किताबों की कहानी, शिक्षा का प्रवाह, शागिर्द हैं वे, जो हैं ज्ञान के आवाह। […]
Aapka tarana दरिया 0 दरिया समुद्र सा है दरिया, अथाह और अजेय, लहरों की कहानी, हर पल नई बताए। धूप में चमकता, सोना रेशम सा, चाँदनी की मासूमियत, छू […]
Aapka tarana फोन 0 फोन की ख़ोज में, रात की खामोशी, बीते पलों की यादें, स्पर्श है सोहबत में। आसमान की ऊँचाई, छू ली एक छुँटी, फिर भी लगता […]