फोन Posted on by फोन की ख़ोज में, रात की खामोशी, बीते पलों की यादें, स्पर्श है सोहबत में। आसमान की ऊँचाई, छू ली एक छुँटी, फिर भी लगता है, फोन से है साथ रूठी। दोपहर की छाँव में, एक संदेश बिखरा, बीती रात की कहानी, फोन में है बसी हुई।
Aapka tarana कार्यालय 0 1. “कार्यालय वह जगह है जहां सपने वास्तविकता में परिणाम होते हैं।” 2. “सफलता का सीधा मार्ग कार्यालय के दरवाजे से होता है।” 3. “संगठन […]
Aapka tarana कर्मों की बौछार 0 जैसा तूने बीज बोया है, वैसा ही फल पाएगा। लगाए तूने कांटे है तो, फूल कहां से आएगा। संबंध बनाए थे मैने, व्यवहार के कच्चे […]
Aapka tarana Title: “कार्यालय की दुनिया: ताहिर, नूर, पंकज, मनीष, सौरभ” 1 Certainly! Here’s a short Hindi poem inspired by the names you provided: ताहिर, नूर, पंकज, मनीष, सौरभ, काम के मैदान में, सब हैं बहादुर। कार्यालय […]