फोन Posted on by फोन की ख़ोज में, रात की खामोशी, बीते पलों की यादें, स्पर्श है सोहबत में। आसमान की ऊँचाई, छू ली एक छुँटी, फिर भी लगता है, फोन से है साथ रूठी। दोपहर की छाँव में, एक संदेश बिखरा, बीती रात की कहानी, फोन में है बसी हुई।
Aapka tarana achhi bate नई सुबह, नई उड़ान 0 “सुप्रभात कविता” हर भोर नई किरणें, नई आस जगाएं, जीवन के हर पथ को, रौशनी दिखाएं। बंद आँखों में सपनों का संसार हो, […]
Aapka tarana किताबों की कहानी 0 किताबों की कहानी, एक अनगिनत दुनिया का दरवाजा, पन्नों के बीच में छुपी हर कहानी एक राजा। शब्दों की मिठास, वाक्यों की साहस, किताबों की […]
Aapka tarana सहरा 0 सहरा, एक रेगिस्तानी सागर, रेत की चादरों में बसी एक कहानी। सूखे की भूमि पर खड़ा, उम्मीद की किरणें हर ओर बिखरा। गरजता सूरज, धूप […]