फोन Posted on by फोन की ख़ोज में, रात की खामोशी, बीते पलों की यादें, स्पर्श है सोहबत में। आसमान की ऊँचाई, छू ली एक छुँटी, फिर भी लगता है, फोन से है साथ रूठी। दोपहर की छाँव में, एक संदेश बिखरा, बीती रात की कहानी, फोन में है बसी हुई।
Aapka tarana सपनों की राह पर 2 हर कदम पर मुश्किलें आएंगी, तूफानों की लहरें उठेंगी, लेकिन मंजिल की ओर बढ़ते रहो, हौसलों की कश्ती संभालते रहो। हार के डर से पीछे […]
Aapka tarana दिल्ली की बारिश और सफ़र 0 दिल्ली की बारिश में सफ़र लंबा है, रास्ते धुंधले हैं, मंज़िल धुँधला है। पर कदम-कदम पर रोशनी जलती है, दिल में उम्मीद की लौ हर […]
Aapka tarana कुम्भ मेला 0 कुम्भ मेला, भारतीय सांस्कृतिक कला और धर्म का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह महाकुम्भ नामक स्थानों पर विशेष रूप से आयोजित होता है और इसमें लाखों […]