ज़रूरतों का रिश्ता ✍️ – सौरभ Posted on by ज़रूरतों का रिश्ता ✍️ – सौरभ लोग आते हैं पास तभी, जब कोई स्वार्थ निभाना हो। खामोश हो जाते हैं सब, जब कुछ हाथ न आना हो। सच तो यही है जीवन का, रिश्ते अक्सर शर्तों से चलते हैं। पर असली अपनापन वही, जो बिना माँगे संग ढलते हैं। 🌹
Aapka tarana दिल्ली की सर्दी 0 दिल्ली की सर्दी, ठंडी हवा का संगीत, कार्पेट की बर्फ, रूमाल की आध राहत। धूप में छुपी सुनहरी धूप, जैसे किसी की मुस्कान, दिल्ली की […]
Aapka tarana मशरूम-दीप की महिमा 0 चुप्पी में जब, छा जाए अंधेरा, मशरूम-दीप जगाता है, प्रकाश का सवेरा। नन्हा सा वो दीपक, छवि में है निराला, अंधकार को हर ले, बन […]
Aapka tarana “आईने में अजनबी: ख़ुद से मिलने की अधूरी दास्तान” 0 दिल की दुनिया में अजब एक समां होता है, ख़ुद से मिलने का भी कब वक़्त मयस्सर होता है। हमने पहचाना जहाँ को बड़ी […]