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बहाने से मिला: एक भव्य कविता

आपके बहुत सुंदर कविता को हिंदी में लिरिक्स में परिवर्तित करता हूँ:
मिल गया आपके बहाने से
नाम ख्वाज़ा बड़ा निराला है,
हिंद के वलियों में सबसे आला हैं।
मेरे ख्वाज़ा जी पीर-ओ मुर्शिद का,
ताल्लुक है बड़े घराने से।।
दर पे आया मैं इक सवाली हूँ,
आपके चौखट का मैं भिखारी हूँ।
रूह तक जगमगा उठा मेरा,
जबसे लौटा हूँ आस्ताने से।।
भ्रम में जीते थे आज टूटा भरम,
मेरे ख्वाज़ा ने किया ऐसा करम।
खिल उठा फूल मेरे आँगन में,
आपके एक मुस्कुराने से।।
जिनकी वजहों से हुआ घर में फ़साद,
उन्हीं लोगों ने किया जीना ख़राब।
मैंने सोचा कि मिट गया “रहमत”,
पर मिटूँगा न मैं मिटाने से।।