कर्मों की बौछार

जैसा तूने बीज बोया है, वैसा ही फल पाएगा।  
लगाए तूने कांटे है तो, फूल कहां से आएगा।  
संबंध बनाए थे मैने, व्यवहार के कच्चे धागों से।  
अब टूट गया है वह धागा, तेरे छलपूर्ण इरादों से।  
कर्मों की बौछार में, हमने बीता वक्त बिताया।  
परिणाम है सामना, अपने ही कर्मों का हो जाएगा।  
जीवन के संगीत में, सारे स्वर हम बजाएंगे।  
प्रेम और सत्य के रंग में, हम खुद को पहचानेंगे।  
इरादों की बाधा में, संबंधों का विघ्न हो जाए।  
धागा टूटे ना, इस आसमानी सफर में, हम सभी मिलकर आगे बढ़ेंगे।