रिश्तों

एक सवाल घर कर गया है,
दिल के रोज़ाना कोने में।
गीत छुपा है रात की चादर के,
राज़ के परदे के पीछे में।
शीशा बनाऊं या पत्थर इसे,
रिश्तों के इस बदलते समय में।