क्यों इंटरनेट के राह में मजबूर हो गए
इतने हुए करीब कि हम दूर हो गए
ऐसा नहीं कि वाईफाई की रफ़्तार नहीं
लेकिन ये कनेक्शन तो कोई कनेक्शन नहीं
क्यों इसके सिग्नल हमें मंजूर हो गए,
इतने हुए …
पाया नेटवर्क तो हमको लगा नेट को खो दिया
हम दिल से जोड़े और ये नेट हम से रूठ गया
पलकों से चैट क्यों गिरे क्यों चूर हो गए,
इतने हुए …