रिश्तों की गहराई: एक अनमोल यात्रा”

Certainly! Here’s a Hindi poem based on the theme:
**रिश्तों की गहराई**
मन से नहीं, बातों से बने ये रिश्ते,  
कुछ चालों में नहीं, बल्कि दिलों के संग बने।  
संवादों में छुपी हैं कहानियाँ अनगिनत,  
ये रिश्ते हमें जोड़ते, दूरियों को मिटाते।  
कभी हंसी, कभी गम की कहानी,  
जीवन की ये अनमोल मिठास कहाँी।  
बातों के संग जुड़े, हर पल नए रंग,  
रिश्तों की गहराई में, छुपी हैं खुशियों की धारा संग।  
जीवन के सफर में, ये रिश्ते हमें साथ ले जाते,  
दुख-सुख के संग, हमें अपने बाहों में समाते।  
रिश्तों की गहराई में छुपी हैं खुशियों की भंवर,  
हर रिश्ता एक खास है, हर पल है यहाँ अनुपम अद्भुत सफर।  
अब चलिए, बुजुर्गों से सीखें प्रेम का पाठ,  
रिश्तों की गहराई में, बसी हैं सच्ची मिठास की बात।  
मन से नहीं, बातों से बने ये रिश्ते,  
कुछ चालों में नहीं, बल्कि दिलों के संग बने।