राशन कार्ड: सरकार का खेल

राशन कार्ड की बातें, सरकार का हाल,

खुश हो जाए जनता, जब मिल जाए दाल।

आटे की बोरी, चावल का चाव,

पहुंचे ना घर तक, बस कागज में बहाव।

 

लाइन में लगकर, दिन गुजारते हैं,

सरकारी बाबू को बस झुक कर निहारते हैं।

हाथ में राशन कार्ड, दिल में उम्मीदें,

महीनों गुजर जाते, पर पेट में हैं किल्लतें।

 

सरकारी सिस्टम का खेल निराला,

राशन हो या रोजगार, सबमें हाहाकार।

कागज़ पे गिनती में देश महान,

हकीकत में जनता ढूंढे इंसान।

 

कभी बंद दुकान, कभी सिस्टम डाउन,

आधार से लिंक, फिर भी लगे ठगाउन।

राशन कार्ड तो है, पर राशन कहाँ,

सरकारी प्रक्रिया में घुमते रहें जहान।

 

ऐसी है सरकार, और ऐसी उसकी रीत,

जनता कहे, “अरे भाई, कब आएगी जीत?”

राशन कार्ड की लिस्ट में हो गया नाम,

फिर भी भरा पेट

नहीं, यही है घोर कलाम!