हास्य व्यंग्य कवित: “तेरे लिए टीवी छोड़ा”
मैं तेरे लिए आया, टीवी छोड़-छाड़ के,
देख न पाया न्यूज़, अपने मन को मार के।
यूट्यूब की धुन भी, कानों तक न आई,
तेरे संग बैठा, हर फ़र्ज़ निभाई।
गूगल का क्या हाल, ये भी पता न चला,
सोचता रहा बस, तू कहीं है क्या भला।
सोशल मीडिया को भी, ताले में बंद किया,
तेरे लिए मैंने, वादा जो कड़ा किया।
फेसबुक पे न स्क्रॉल, इंस्टा को भी छोड़ा,
तेरे साथ समय का, मैंने प्याला थोड़ा।
तू तो है ऑनलाइन, और मैं ऑफलाइन,
देखो क्या हो गया, ये कैसा है टाइम?
अब सोचता हूँ मैं, क्यों इतनी कसम खाई?
टीवी, यूट्यूब, सब से मुंह मोड़ कर,
तेरे लिए सब कुछ छोड़कर आया,
पर तूने जवाब तक न भिजवाया!