चुप्पी में जब, छा जाए अंधेरा,
मशरूम-दीप जगाता है, प्रकाश का सवेरा।
नन्हा सा वो दीपक, छवि में है निराला,
अंधकार को हर ले, बन जाए उजाला।
स्वतः प्रकाश जले जब, सूरज की किरण थमे,
हर दिशा में फैले, जैसे चाँदनी जमक जाए।
निःशब्द, सौम्य सा दीपक, ऊर्जा का स्रोत बने,
मधुर रातों का साथी, मन का चैन तले।
प्राकृतिक सा रूप लिए, है सादगी की पहचान,
सौम्य प्रकाश फैलाए, मधुर करे सबके प्राण।
जगमग-जगमग हो जाए, हर कोना हर द्वार,
मशरूम दीप है सच्चा, नीरव रात्रि का उपहार।
जब भी छाए अंधियारा, और हो राहें बंद,
तब मशरूम-दीप से आए, एक नई उम्मीद प्रबल।
उज्ज्वल भविष्य की किरण, संग यह दीप लाए,
हर दिल में रोशनी का
, नया संदेशा फैलाए।