अवसादित जीवन की आवाज: एक ओजस्वी कविता” Posted on by जीना बिना लक्ष्य के, वह अजीवन सा आवास, साहित्य बिना प्रेम के, थमा रहे अध्यान का विलास। समाज जहाँ नारी को, छूने न पाए सम्मान का स्वाद, ग्रंथ जो हैं अंधकार में, मार्गदर्शन से रौंगत न बदले रात्रि का वाद।
Aapka tarana सुप्रभात कविता 0 ✨ सुप्रभात कविता ✨ मुस्कान है कठिनाई में हौसले की पहचान, 😊 अंधेरों में भी देती है उम्मीद का गान। 🌅 खामोशी है उत्तर, जब […]
Aapka tarana नव निर्मित भवन 0 देवरिया के डॉ. एस के कुशवाहा, चिकित्सकों के आभूषण, महाकाव्य का आधार। नव निर्मित भवन, सुंदर और महिमामय, गृह प्रवेश के दिन, बने सब के […]
Aapka tarana जीवन की सुरुआत 0 1. “सुबह के आसमान में ऊँचाई पा लो, किश्लया अपने सपनों की पहचान बना लो।” 2. “शक्ति का संग्रह, सुबह का प्रेरणा, किश्लया से बनता […]