अवसादित जीवन की आवाज: एक ओजस्वी कविता” Posted on by जीना बिना लक्ष्य के, वह अजीवन सा आवास, साहित्य बिना प्रेम के, थमा रहे अध्यान का विलास। समाज जहाँ नारी को, छूने न पाए सम्मान का स्वाद, ग्रंथ जो हैं अंधकार में, मार्गदर्शन से रौंगत न बदले रात्रि का वाद।
Aapka tarana मध्यम वर्ग की महिमा 0 मध्यम वर्ग है देश की शान, संघर्षों से भरी इसकी पहचान। हिम्मत है इसकी सबसे बड़ी थाती, सपनों को पाने की सदा है घाती। […]
Aapka tarana अधिकारी 0 अधिकारी, देश की सेवा में, निष्कलंक विशेषज्ञ, दुर्गम पथों में। कानून की रक्षा, न्याय का स्वामी, अधिकारी हैं सजीव सूत्र, विश्व को धरोहरी। कठिनाईयों में, […]
Aapka tarana लोहड़ी का त्योहार 0 1. “लोहड़ी का त्योहार आया, सर्दी की ठंडक मिटाई। आग लगाकर नाचो गाओ, हर दिल में राहत बिखराई।” 2. “लोहड़ी के बोनफायर के आसपास, हृदय […]