अवसादित जीवन की आवाज: एक ओजस्वी कविता” Posted on by जीना बिना लक्ष्य के, वह अजीवन सा आवास, साहित्य बिना प्रेम के, थमा रहे अध्यान का विलास। समाज जहाँ नारी को, छूने न पाए सम्मान का स्वाद, ग्रंथ जो हैं अंधकार में, मार्गदर्शन से रौंगत न बदले रात्रि का वाद।
Aapka tarana दोस्ती की गहराई 0 हमें आपकी चिंता है, दोस्त, आपकी खुशियों की हमें क्या कीमत! जो भी आपके दिल के क़रीब है, उसका हर दर्द भी हमें दर्द से […]
Aapka tarana एक अच्छी शुरुआत 0 दिन में छिपा है, एक नया उजियारा, संभावनाओं से भरा, हर पल हमारा। न कोई दिन बुरा, न कोई रात हारी, बस करना है हमें, […]
Aapka tarana बेटियाँ: खुशियों का उजियारा” 0 बेटियाँ हैं अनमोल सितारे ✨ बेटियाँ हैं घर का उजियारा, प्यार से भरा उनका प्यारा सहारा। हंसते हुए वो सपने सजातीं, हर दिल को वो […]