सोमवार की आरती

जय शिव ओंकारा, ॐ जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे।
हंसासन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखत, त्रिभुवन जन मोहे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥अक्ष, सुक्ष, कर्मप्रभु, भास्कर, ताजे।
मण्डलाकार सुरेश्वर, कण्ठ कटी सा है॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥श्वेतांबर पीतांबर बाघंबर अंगे।
संकट से भीम सो, काल से रंगे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥