आरती सूर्य देव की,
जो दरसते सुख और समृद्धि।
आरती सूर्य देव की,
जो दरसते सुख और समृद्धि॥
मध्यमाल्य धारन, रथ पर सवार।
सप्ताश्वर जोगी, जग के पालनहार॥
आरती सूर्य देव की,
जो दरसते सुख और समृद्धि॥
प्रकाश के स्रोत, जीवन दाता।
सभी दुःख और संकट को, दूर करने वाला॥
आरती सूर्य देव की,
जो दरसते सुख और समृद्धि॥
सप्ताश्वर रथ में, सवार हो प्रकाश।
सप्त दिशाओं में फैला, सुगंधित आभास॥
आरती सूर्य देव की,
जो दरसते सुख और समृद्धि॥
नमन तुझको, सदा प्रभु,
जो भक्तों के सभी संकट दूर कर दे॥
आरती सूर्य देव की,
जो दरसते सुख और समृद्धि॥