एक राह है सुनसान, मन में गूंथा तान,
*बस इसे छोड़ दो*, जीवन की मिठास बढ़ाओ।
जब दुनिया की छाया, थोड़ी ने दी चोटें,
परेशानी में ना डूबो, *बस इसे छोड़ दो*।
बच्चों की मुस्कान, जीवन का है रंग,
उनके सपनों को, मत थोपों, *बस इसे छोड़ दो*।
आवृत्ति की राह में, मेल नहीं सबको,
अपने रास्ते पर, हौंसला बना रखो।
बूझे बुढ़िया की आलोचना, हो सकती है मुश्किल,
पर *बस इसे छोड़ दो*, मन को हौंसला मिलेगा।
इच्छा और क्षमता के, बीच अंतर मत बढ़ाओ,
आज़ादी से जियो, *बस इसे छोड़ दो*।
जीवन का मार्ग, हर किसी का अपना,
तुलना को छोड़ो, खुद को मेहसूस करो।
जब जीवन का खजाना, है हाथों में बिखरा,
दैहिक कमाई को गिनना, *बस इसे छोड़ दो*।
आखिरी पर एक बात, यह तुम्हें पसंद नहीं आए,
*बस इसे छोड़ दो*, स्वतंत्रता में है सच्चाई।