आरती साईं बाबा, सुर्ख़ कोमल चोला।
धरती पर अवतारा, अंस रघुकुलबोला॥
आरती साईं बाबा, सुर्ख़ कोमल चोला॥जटा मुकुट सिर सोहे, दिगंबर रूप निराला।
नैनों में ज्योति जलती, स्वर्णिम भाल विशाल॥
आरती साईं बाबा, सुर्ख़ कोमल चोला॥जलते धूप धवन से, अमृत गंगा झरे।
चरणों में ध्यान सबका, संकट सब हरे॥
आरती साईं बाबा, सुर्ख़ कोमल चोला॥श्रद्धा और सबूरी, भक्तों को समझाया।
साईं बाबा महिमा, सबने मिल गाया॥
आरती साईं बाबा, सुर्ख़ कोमल चोला॥साईं कृपा से सबका, जीवन सुखमय होवे।
जो भी मन से ध्यावे, सबके कष्ट खोवे॥
आरती साईं बाबा, सुर्ख़ कोमल चोला॥