दिन में दो पल हंस
रचनाकार: सौरभ कुमार
दिन में दो पल हंसो, एक यार से बात करो,
भीड़ में गुम हो जाओ, पर दिल से मुलाकात करो।
काम तो रोज़ के हैं, कभी कम, कभी ज़्यादा,
पर कुछ पल चुराओ, दिल से रिश्ता निभाओ।
दुनिया की रफ्तार में, मत खुद को खो दो,
हर रोज़ हंसी बांटो, और खुशियां बो दो।
बातें छोटी सही, पर दिल को छू जाएंगी,
दोस्ती की ये रस्में, दिलों को जोड़ जाएंगी।
तो रोज़ करो वादा, हंसने का बहाना ढूंढ़ो,
यारी के इस सफर में, खुशियों
के फूल बिछा दो।