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शादी की हंसी, शॉपिंग की लिस्ट
(By Saurabh Kumar)
शादी की घड़ी, जब आती है,
हर कोई मुस्कान सजाता है।
लेकिन दूल्हा मन में सोचता,
“यार, ये कौन सी मुसीबत लाता है!”
दुल्हन तो कहती, “सब अपना है,”
सासू माँ की ममता प्यारी है।
पर शादी के बाद सुनने को मिलता,
“बेटा, ये कुर्सी तुम्हारी नहीं, हमारी है!”
पहली रात की बात ही निराली,
दूल्हे ने पूछा, “जानू, चाय या कॉफी?”
दुल्हन हंसकर बोली, “पहले बता,
तुम्हें चाय बनानी भी आती है, सॉरी?”
ससुराल की बातें बड़ी हैं प्यारी,
शादी से पहले सब हैं अधिकारी।
लेकिन शादी के बाद जब पूछो कुछ,
“हाथ मत लगाना, ये है सरकारी!”
और शॉपिंग की लिस्ट, पूछो मत भाई,
दूल्हे की ज़िंदगी उसमें ही समाई।
“ये लाओ, वो लाओ, सब कुछ नया,
बस दूल्हा बेचारा चुप रह जाए सदा।”
शादी के बाद का एक ही मंत्र,
“हां जी, आप सही हैं, वो ही हमारा तंत्र!”
दूल्हा अब सोचता, “क्या कर दी मिस्टेक,
अब तो बस मान लो, नो टेक्नीकल ब्रेक!”