जो होना है, होगा

सब कुछ धुंधला सा लगे,

सपने भी जैसे थम से गए।

7 बजे का समय आया,

दिल की बातें सबने भुला दिया।

 

क्या बोले, क्या सुने,

सच की परछाइयों में खो गए।

जो होना है, होगा ही,

जो नहीं होना, वो नहीं होगा।

 

कभी खुद से बातें करें,

कभी खामोशियों में खो जाएं।

जब मन की बगिया सूनी हो,

तब खुद को फिर से सजाएं।

 

यह जिंदगी की एक धारा है,

जो बहती है, संग लाती है।

चिंता की चादर उतार कर,

बस जीने का मजा उठाते हैं।

 

आपका मन अगर थका है,

तो खुद को फिर से खोजिए।

हर पल का आनंद उठाइए,

जो

होना है, उसे होने दीजिए।